मोक्षदायी माँ नर्मदा मध्यप्रदेश की जीवन रेखा कही जाने वाले अपने रमणीय और उदांत सौन्दर्य से सुशोभित माँ नर्मदा के ईद-गिर्द हमारा जीवन बीत रहा है यह हमारा सौभाग्य ही तो है । अमरकमन्टक में ठोटे से कुण्ड से अवतरित माँ नर्मदाकी इतनी कम जल-राशि ने अपने प्रवाह में ऐसी वृद्धि कर करोडों मनु्ष्यों, वन्यजीवों को शुद्ध शीतल जल एवं हजारों एकऱ कृषिभूमि को सिचिंत कर अपनी विशाल उदारता प्रदर्शित की माँ नर्मदा जो सर्वत्र फलदायिनी समझी जाती है ।
पावनता की दृष्टि से माँ नर्मदा हर घाट पर पुण्यदायी है जबकि गंगा, जमुना, सरस्वती के कुछ ही घाट-क्षेत्र पुण्यदायी माने गये है ।
चारों घामों का समापन औंकारेश्वर नर्मदा तट पर ज्योतिलिंग के दर्शन से होता है नर्मदा स्नान सर्वत्र फलदायी, सभी क्रुरग्रहों की शांति के लिए किया जाता है । इन तटों की अपनी कथा-विवेचना है जिनकी वजह से ज्यादा महत्व दिया जाता है । आस्था, श्रृद्धा और अटुट भक्ति को समेटे पुण्य सलिला की परिक्रमा मात्र से ही सारे घामों का फल प्राप्त होता है ।
उद्दात्त सौन्दर्य से सुशोभित पुण्य सलिला माँ नर्मदा की आज के इस बदलते युग में भी अपने महत्व-महिमा कायम है वही माँ आज प्रदुषित हो रही है संकटग्रस्त स्थिति में है । माँ नर्मदा में प्रतिदिन शहर का गंदापानी, कचरा, मलमुत्र की िनकासी नर्मदा में समाहित हो जाती है यही सब प्रशासन के सामने होता है दुषित होने से बचाने के लिए कई योजनाएं चलाई जाती है लेकिन वे सारी बेअसर साबित होती है । माँ नर्मदा के किनारे पर फैली गंन्दगी दृढइच्छाशक्ति के अभाव में इसकी सौन्दर्यता, पवित्रता बरकराल रखने की सारी योजना पूर्ण नही हो पाती है । माँ नर्मदा के किनारे बसे ग्रामीण ओर उनके खेतों से रासायनिक खाद बारिश के मौसम में बहकर इसके जल में समाहित होता है जिससे भारी मात्रा में इसके शीतल जल में रासायिनक खाद मिल जाती है । वहीं छाटों पर मुठेरों का अभावग्रस्त होने से वाहन चालक दो पहिया व चार पहिया वाहन यहाँ धोये जाते है जिसमें इन वाहनों से निकलने वाला दुर्गनयुक्त आईल, डीजल, पेट्रोल, घासलेट इत्यादि से बुरी तरह से प्रदुषित होती है एक सर्व के अनुसार - प्रतिदिन माँ नर्मदा में स्नान करने एवं गन्दें कपडे धोने से दो ट्रक ितना साबुन इसमें समाहित होता है मलमुत्र, कुण्डा-करकट, पोलेथीन रैपरों, खाद्य सामग्री, फूल-पत्ती, मालाएँ, हवन-पुजन आदि अनुष्ठान करने आए यात्री इन घोटों पर ये सभी कचरा बिना बेरोकटकिनारों पर फेक देते है जिससे किनारे पर इन पदार्थो के कारण सडन पैदा होती है
इसी तरह हमारी हिन्दु मान्यताओं के अनुसार माँ नर्मदा के घाट पर किया गया अन्तिम संस्कार मृतक की आत्मा को शांति प्रदान करने वाला माना जाता है इसी वजह से इसके घाट पर इस क्रिया सम्बन्धी सारी सुविधाएँ उपलब्ध है यहाँ लाई गई अन्तिम क्रिया के लिए शवदाह किनारे पर किया जाता है चिता को किनारे के समीप रख अर्प्रित फुल-मालाएँ व अन्य सामग्री दिये गये मुण्डल बाल भी इसी धारा में प्रवाहित किये जाते है और बहाव किनारे की ओर ही होने की वजह से ये सारी सामग्री किनारे की ओर जमा होकर सडने लगती है जो सडन पर गन्द छोडती है । कुछ अपवाद छोड शव-दाह के उपरान्तप कई बार शवपूर्णतः जल नही पाता वह अर्द्धजला सा शव ऐसी ही स्थिति मं इसकी जल प्रवाह में प्रवाहित किया जाता है दौबारा लकडी खरीदना और फिर अर्द्धजला शव जलाया नही जाता है जो गलत है इसके जल में शव के अर्द्धजले होने की स्थिति में प्रवाहित करना अनुचित है । प्रशासन भी चाहकर कुछ बोल नही पाला क्योंकि यह लोगों की धार्मिक आस्था से जुडा होता है
माँ नर्मदा की पवित्रधारा में तीर्थयात्रियों, श्रृद्धालुओं, द्वारा पूजन-हवन करने, धार्मिक अनुष्ठान करने दुर दुर से हजारों यात्री रोजाना आते है जिनके लिएं इन घाटों पर यदि प्रशासन पूजन-सामग्री का अपव्यय को एकत्रित करने के लिए इन घाटों पर एक सफाई कर्मी तैनाद करना दे तो इन घाटों व किनारो को प्रदुषित होने से बचाया जा सकता है जो यात्रियों को इसके जल प्रवाह में कचरा नही फेकने देगा साथ ही वहाँ कुण्डा एकत्रित करन के लिए बडे पात्र लगा दिये जाए
माँ नर्मदा को प्रदुषण से बचाने के लिए वहां के नागरिकों, तटों पर स्थित नाव चालकों, आश्रमकर्त्ताओं, ट्रस्ट के पुरोहितों का सहयोग देना चाहिए ताकि इससे हमारी आस्था सदैव बनी रहे आने वाली पीडी भी इसके निर्मल जल उदान्त सौदर्यता का लुफ्त उठा सके । माँ नर्मदा को प्रदुषण से बचाने के लिए वहां के नागरिकों, तटों पर स्थित नाव चालकों, आश्रमकर्त्ताओं, ट्रस्ट के पुरोहितों द्वारा किया गया श्रृमदान व्यर्थ हो ही नही सकता क्योंकि माँ नर्मदा के स्नान मात्र से सारे पाप कट जाते है ।
- राज विंचुरकर, दुबे काँलोनी,
खण्डवा (म.प्र.) फोन - ०७३३२२४४१९९

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