 उपेक्षा राष्ट्रभाषा की, जिम्मेदार कौन ?आमतौर पर नेता और अफसर का प्रयोग करने में स्वयं कदाचित लज्जित अनुभव करते हैं, फिर उन्हीं राजनेताओं, अफसरों द्वारा हिन्दी उत्थान कार्यक्रम हिन्दी दिवस मनाये जाते है मात्र १० से १५ मिनट के भाषण, गोष्ठी द्वारा अपने साल ... आगे पढ़ें...
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 काम, क्रोध, लोभ नर्क के द्वार काम क्रोध मद लोभ सब नाथ नरक के पन्थ । सब परिहरि रधुबीरहि भजहू भजहि जेहि सन्त ।।रामचरित मानस, गीता इत्यादि ग्रन्थों में काम, क्रोध व लोभ ही दुःख का कारण बतलाया गया है । सार - हे नाथ, काम, क्रोध मद और लोभ - ये सब नरक के द्वार ... आगे पढ़ें...
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 कथा-संसार - तुलसीदास की भगवान के प्रति आस्थादुलसीदास की पत्नी अपने पिता के घर गई हुई थी । उन्हें पत्नी से मिलने की तीव्र उत्कण्ठा हुई । अंधेरी रात में वर्षा हो रही थी । अंधेरी रात में वर्षा हो रही थी । उसकी परवा किये बिना चल दिये । रास्ते में उमड़ती नदी ... आगे पढ़ें...
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 छत्रपति शिवाजी का अंहकार छत्रपति शिवाजी सामन्तगढ़ किले का निर्माण करा रहे थे । हजारो मजदीर काम में लगे हुएँ थे, यह देखकर शिवाजी को अंहकार हो गया कि वे इतने व्यक्तियों का पेट भर रहे है । वे ही इन लोगों के पालनहार है यदि वे काम न दे तो इतने व्यक्तियों का ... आगे पढ़ें...
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 विद्धानों में ईर्ष्या-द्वेष नहीं होता है ? इस विषयागत एक प्राचीन कथा "संस्कृति-सजीवनी श्रीमद्भागवत एवं गीता" ग्रंथ में पढ़ने को मिली जो इस प्रकार है -दो विद्धान पण्डित एक गृहस्थ के घर अतिथि हुए । एक विद्धान स्नान-गृह में गये थे । गृहस्थ ने दूसरे से उनके ... आगे पढ़ें...
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 सत्संग के प्रताप से ही संभव ही जीवन में व्यवहारिक परिवर्तन ? ससत्संग की महिमा के बारे में जितना कहाँ जाएँ उतना ही कम है संसार में जितने भी महापुरुष हुए वे सभी किसी न किसी तरह से सत्संग से प्रभावित होकर ही महान बने है । महर्षि बाल्मीकि शूद्र जाति के थे और ... आगे पढ़ें...
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 ईश्वरीयता के नाम पर अन्धविश्वास को न बढ़ावा दे ?ब्राह्मण स्वरुप कैसा हो ? "ब्राह्मणस्य हि देहोस्यं क्षुद्रकामाय नेष्यते । कृच्छाय तपसे चेह प्रेत्यानन्तसुखाय च ।।"ब्राह्मण का यह शरीर क्षुद्र कामनाओं के लिए नहीं हैं । वह तो लोक में घोर तप के लिए और परलोक ... आगे पढ़ें...
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 >प्रेरक कथा - वरदराजमन्दबुद्धि होने की वजह से राम से हर को उसका उल्लास करने लगा । पाठशाला में में सभी सहपाठी उसका मजाक उड़ाते थे । राम की मूर्खताओ को देखते हुए उसके सभी सहपाठी उसे बरध राज (बैलों का राजा) कहकर पुकारने लगे थे । सभी जगह अपमानित होता था । एक ... आगे पढ़ें...
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"काल करे सो आज आज कर, आज करै सो अब"कल किसने देखा है भविष्य कभी प्रतिक्षण वर्तमान के रुप में ही प्राप्त होता है आज का कार्य हमें आज ही कर लेना चाहिए । कल का क्या भरोसा, किसने देखा । कहने का तात्पर्य है कि मानव जीवन में समय बहुत मुल्यवान है । जो समय के साथ, ... आगे पढ़ें...
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